अ पनी कई समस्याओ के लिए कई बार हम स्वम जिम्मेदार होते है, हर जगह बात करने की आदत कई बार हमें मुस्किलो में भी डाल देती है | कई बार ऐसा भी होता है कि हम सोचते है की अब हमने कह दिया | अब ना चाहते हुए भी ये काम करना ही पढ़ेगा अब मुँह से जो बात निकल गयी उसे कैसे बदल सकते है | खुद की कही बातो में हम खुद ही उलझ के रह जाते है | कई बार क्रोध में आ कर किसी को ऐसे शब्द कह जाते है जिसके लिए बाद में पश्ताना पढ़ता है आपने तो क्रोध में बोल दिया पर सामने वाला इन बातो को भूल नहीं पाता | आपको शायद ये एहसास भी नहीं होता कि आपके शब्दो का उसके दिल पर क्या असर हुआ है | कई बार मुँह से निकले शब्द रिश्तो को भी तोड़ देते है इसलिए "शब्द सम्भाल के बोलिये शब्द के हाथ है न पाव एक शब्द औषधि करे और एक शब्द करे घाव है " आपका एक शब्द किसी की जिंदगी भर का घाव बन सकता है और आपका एक शब्द किसी की जीने की वजह बन सकता है आप विचार करे की आपकी वाणी कैसी है | कई बार लोग कहते है की हम तो सच कह देते है फिर किसी को मिर्ची लगे तो लगे | आप सच कहते ही इसलिए है कि किसी को चोट पहुँचे उसको बात चुभनी चाह...
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